कांग्रेस का पाप-घड़ा फूटेगा नहीं, बल्कि दफनाया जायेगा।
क्या आप इन्हें जानते हैं? सुकन्या देवी! इनके पिता बलराम सिंह कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता थे।
बलराम सिंह नहीं जानते थे की वो किस परिवार की सेवा कर रहे है, और बदले में मिली आज तक की गुमनामी। आखिर ऐसा क्या हुआ था इस परिवार के साथ जिसका आज तक कुछ नहीं पता चला।
बलराम सिंह ने राहुल गांधी और उसके विदेशी दोस्तों ( 2 इटली के और 2 ब्रिटेन के) के अमेठी में ठहरने की व्यवस्था की थी। इनकी 19 साल की बेटी सुकन्या जब राहुल को देखने पहुंची तो नशे में धुत इन 5 दरिंदों ने सामूहिक बलात्कार कर डाला।
देश पे कब्ज़ा था खुद ही सरकार थे इसीलिए कुछ नहीं हो पाया इसको और इसके विदेशी दोस्तों को।
बलात्कारियो को नमाजवादी का सहारा।
जब मामला कोर्ट-कचहरी पहुंचा तो रातों रात इस कन्या, पिता बलराम सिंह और उसके परिवार को गायब कर दिया। जिनका आज तक कुछ नहीं पता, यहाँ तक कहते है की उस परिवार में आठ सदस्य थे।
उस समय यूपी में नमाजवादी पार्टी की सरकार थी, जिनका काम इसके और इसके विदेशी अय्याश दोस्तों के साथ ढाल बनकर खड़े होना था। जितना हो सकता है उतना अपनी सरकार का दुरपयोग किया गया था ,मुलायम सिंह की सरकार ने सभी सरकारी वकील के बयान बदलवा दिए। राजकुँवर और उसके चारों विदेशी मित्रों को बिना मैडिकल टैस्ट किए लन्दन भगा दिया गया।
“इमरजेंसी लगाकर अपराधियों को बचा लिया गया।”
अखबार में खबर छापने वालो पर FIR कर मुहँ बंद करवा दिया गया। मियालॉर्ड ने चुप्पी साध ली, सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन लगाने वालो को सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाया।
बाद में ब्यान, रिपोर्ट बदलने वाले गवाहों, वकीलों, पुलिस अधीक्षक, DGP को कांग्रेस सरकार ने कैश पुरस्कार दिए।
बलराम सिंह, सुकन्या देवी और परिवार के 8 लोगों का आजतक कुछ पता नहीं चला। ये है कांग्रेस का तथाकथित युवराज जोकि आजतक खुला घूम रहा है और खुलेआम भारत तोड़ो यात्रा कर रहा है। और न जाने कितनी और कोशिश करता होगा ऐसे कुकर्मो को अंजाम देने के लिए।
इसकी सच्चाई तब सामने आयेगी जब पीड़ित कन्या सुकन्या या फिर उसके परिवार के लोग सामने आयें. यह सच्चाई भी तब तक पता नहीं चल
पायेगी कि क्या सचमुच राहुल गांधी और सोनिया गांधी के इशारे पर सुकन्या सहित उसके माता पिता को “गायब” कर दिया गया है।
पप्पू, देर है पर अंधेर नहीं। चिकाकर्ता किशोर समरीते बताते हैं कि जिसे सुकन्या देवी बताकर पुलिस ने अदालत के
सामने पेश किया है उसका नाम मोना है, जबकि सावित्री देवी की जगह कीर्ति सिंह और बलराम सिंह की जगह डॉ बलराम सिंह को पेश किया गया है. किशोर कहते हैं कि उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं और उन्हीं सबूतों के आधार पर वे सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं.
ऐसे चमचे गुलाम और सेकुलर कीड़े एक बलात्कारी को आका बनाये फिरते है और ज्ञान देते है सविधान का।
