“जिसका जन्म ही भारत को तोड़ने के एजेंडे पर हुआ हो।”– पुराना नाम: इस पार्टी को मूल रूप से मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (MIM) के नाम से जाना जाता था। मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (MIM), जिसे अब AIMIM के नाम से जाना जाता है, का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है। इसका सफर एक धार्मिक संगठन से शुरू होकर एक प्रमुख राजनीतिक दल तक पहुँचा है:
- स्थापना (1927)
MIM की स्थापना 12 नवंबर 1927 को हैदराबाद रियासत में नवाब महमूद नवाज खान द्वारा की गई थी। शुरुआत में इसका नाम ‘इत्तेहाद बैनुल मुस्लिमीन’ था और इसका मुख्य उद्देश्य हैदराबाद के मुसलमानों के हितों की रक्षा करना और उन्हें निज़ाम के शासन के प्रति एकजुट करना था।
2-1938 में नवाब बहादुर यार जंग इसके अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में यह संगठन बहुत शक्तिशाली हो गया और इसने एक राजनीतिक स्वरूप लेना शुरू कर दिया। उस समय यह संगठन “अनल मलिक” (हम ही राजा हैं) के नारे के साथ निज़ाम की संप्रभुता का समर्थन करता था।
3-कासिम रिज़वी और रज़ाकार (1944-1948)-1944 में बहादुर यार जंग की मृत्यु के बाद, कमान कासिम रिज़वी के हाथों में आ गई। रिज़वी के नेतृत्व में MIM एक कट्टरपंथी संगठन बन गया और उसने ‘रज़ाकार’ नामक एक निजी मिलिशिया (स्वयंसेवक सेना) तैयार की। रज़ाकारों ने हैदराबाद के भारत में विलय का हिंसक विरोध किया और आम जनता पर अत्याचार किए।
सरदार पटेल के आगे कट्टर जिहादी एजेंडा टिक नहीं पाया। प्रतिबंध और पुनर्गठन (1948-1958)
प्रतिबंध: 1948 में “ऑपरेशन पोलो” की सफलता के बाद सरदार पटेल के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय ने MIM पर प्रतिबंध लगा दिया और उसके नेता कासिम रिज़वी को जेल भेज दिया गया।
हैदराबाद का भारत में विलय: सरदार पटेल ने हैदराबाद को “भारत के दिल में एक अल्सर (नासूर)” कहा था, जिसे हटाना देश की एकता के लिए अनिवार्य था। उनके दृढ़ संकल्प के कारण ही 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद का पूर्ण रूप से भारत में विलय संभव हो सका।

एक सपना—गजवाहिंद
चेहरे बदले, नाम बदले लेकिन भारत के प्रति कट्टर जिहादी सोच नहीं बदली। पुनरुद्धार: 1957 में जेल से रिहा होने पर, पाकिस्तान जाने से पहले रिज़वी ने पार्टी की कमान अब्दुल वाहेद ओवैसी (असददुद्दीन ओवैसी के दादा) को सौंप दी।
नया नाम: 2 मार्च 1958 को अब्दुल वाहेद ओवैसी ने पार्टी को ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ (AIMIM) के रूप में पुनर्जीवित किया। उन्होंने पार्टी के संविधान को बदला और इसे भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा रखने वाले एक राजनीतिक दल के रूप में स्थापित किया।
- ओवैसी परिवार का नेतृत्व (1975 से वर्तमान)
सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी: 1975 में अपने पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने कमान संभाली और हैदराबाद की राजनीति में पार्टी को अजेय बनाया।
असददुद्दीन ओवैसी: 2008 में अपने पिता की मृत्यु के बाद वे अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में पार्टी ने तेलंगाना के बाहर महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अपनी पैठ बनाई है।
जिहादी रजाकारों का राष्ट्र के नाम पर फैलाया गया फिलिस्तीनी भ्रम:- इस देश पर सबसे ज्यादा अधिकार मुसलमानों का हैं, हमने इस देश की आज़ादी के लिए उस वक़्त कुर्बानियां दी जिस वक़्त BJP और RSS के लोग अंग्रेजों की मुखबिरी कर तलवे चाट रहे थे”
