India’s First Madrasa mindset Education Minister Maulana Azad:-“भारत के पहले कट्टर शिक्षा मंत्री का विवादित दौर।”

“जेहादी एजेंडा में फंसी भारतीय शिक्षा”-जिस भूमि पर वैदिक शिक्षाएं, गुरुकुल और शास्त्रों की गहरी समझ रही है। फिर सवाल उठता है कि ऐसे देश में क्यों मदरसे छाप मौलाना आज़ाद जैसे Education Minister बनाए गए जिसकी अपनी खुद की ही शिक्षा और ज्ञान मदरसे से पैदा हई थी।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कोई फॉर्मल स्कूलिंग नहीं की थी।
वे भारत के नागरिक भी नहीं थे; उनके दादा मक्का में बस गए थे, जबकि वे मक्का में पैदा हुए थे और मक्का और मिस्र में इस्लामिक अज़हर मदरसे में पढ़े थे। फिर भी, पंडित नेहरू ने उन्हें भारत का एजुकेशन मिनिस्टर बनाया।
जब हमारे पुराण‑शास्त्र इतने मजबूत थे, तब शिक्षा मंत्रालय में ऐसे मदरसे छाप क्यों बैठे?
एजुकेशन मिनिस्टर बनने के बाद,मौलाना आज़ाद ने अपनी ही सोच वाले एक कट्टर जेहादी इंसान को ढूंढा, ताकि उन्हें भारत का एजुकेशन सेक्रेटरी बनाया जा सके। अपनी इस तलाश के बाद, उन्हें एक कट्टर मुस्लिम अधिकारी, ख्वाजा गुलाम सैय्यदीन मिले। बस तभी से ये जेहादी अपने फिदाइन मंसूबे हमारी पीढ़ियों में शिक्षा के माधयम से थोपते आ रहे है।
इन जेहादियों के एजेंडों ने शिक्षा को देशभक्ति, विज्ञान और संस्कृति से अलग, केवल अपने धार्मिक और राजनीतिक स्वार्थ का माध्यम बना दिया।
“संस्कृति को बर्बाद करने वाले को भारत रत्न?”
हज़ारों साल की सभ्यता, वेद‑पुराण, कला और लोक परंपराओं ने हमें दुनिया में अद्वितीय पहचान दी। फिर सवाल उठता है—संस्कृति को बर्बाद करने वाले को भारत रत्न कैसे मिल सकता है?
इतना ही नहीं,जब इन जेहादियों का एजेंडा भारत की संस्कृति के ऊपर हावी कर दिया गया और राष्ट्र की ताकत को कमजोर कर दिया गया।और उसके एजुकेशन सेक्रेटरी, ख्वाजा गुलाम सैय्यदीन को ‘पद्म भूषण’ अवॉर्ड से भी सम्मानित किया। जब इन कोंग्रेसियो का इससे मन नहीं भरा तो भारत का सर्वोच्च सम्मान ऐसे मदरसे छापो को दे दिया।
इसी ख्वाजा गुलाम सैय्यदीन की बेटी का नाम सैयदा हामिद है। भले ही सैयदा हामिद एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS/एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस) में नहीं थीं, लेकिन इंदिरा गांधी ने उन्हें प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (PMO) में सेक्रेटरी बना दिया था, क्योंकि वह एक कट्टर मुस्लिम परिवार से थीं।
इसी सैयदा हामिद को ‘पद्म श्री’ अवॉर्ड भी दिया गया था, (कांग्रेस के ज़माने में पद्म श्री, पद्म भूषण जैसे अवॉर्ड किलो के हिसाब से बांटे जाते थे, और उनमें भी मुसलमानों को बहुत पसंद किया जाता था)
बाद में मनमोहन सिंह प्राइम मिनिस्टर बने और सोनिया गांधी और राहुल गांधी ‘सुपर प्राइम मिनिस्टर’ बने, फिर इसी कट्टर मुस्लिम सैयदा हामिद को कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा दिया गया और प्लानिंग कमीशन का मेंबर बनाया गया।
यही सैयदा हामिद कहती हैं कि यह धरती अल्लाह ने बनाई है, इसलिए बांग्लादेशी मुसलमानों को भी भारत में रहने का हक है और आप उन्हें देश से बाहर नहीं निकाल सकते।
Gen-Z माफ़ नहीं करेगा उन नेताओं को जिन्होंने हमारी संस्कृति बर्बाद कर दी।
यह नई पीढ़ी है—याददाश्त छोटी नहीं, सवाल तेज़ हैं। Gen-Z माफ़ नहीं करेगा उन नेताओं को जिन्होंने सत्ता, स्वार्थ और एजेंडों के लिए हमारी संस्कृति को कमजोर किया। जिन्होंने परंपरा को पिछड़ापन कहा, विरासत को बोझ बनाया और पहचान को भ्रम में बदला। आज का युवा दिखावे से नहीं, तथ्यों और असर से बात करता है—और वह जानता है कि संस्कृति सिर्फ़ अतीत नहीं, भविष्य की नींव होती है।
