Rahul Gandhi is puppet in the hands of George Soros

Indian opposition Leaders family first, Nation second and Dynasty over democracy:-लोकतंत्र के नाम पर कॉरपोरेट फैमिली बिज़नेस।

Indian opposition Leaders family first, Nation second and Dynasty over democracy:-लोकतंत्र के नाम पर कॉरपोरेट फैमिली बिज़नेस।

Rahul Gandhi is puppet in the hands of George Soros | Congress | Sonia  Gandhi | Bharatiya Janata Party
Rahul Gandhi is puppet in the hands of George Soros

देश सेवा कम, परिवार सेवा ज्यादा:- भारत की Gen-Z जब से पैदा हुई है, उसने राजनीति में बदलाव नहीं बल्कि परिवारों को ही पार्टी चलाते हुए देखा है। उनके लिए राजनीति विचारधारा नहीं, बल्कि विरासत का खेल बनकर सामने आई है। न जाने कितनी पीढ़िया चली गयी है इन परिवारों को देश को खोखला करते हुए देखा जो है। अपनी सत्ता के लालच में देश की सबसे कांग्रेस पार्टी ने देश की ज़मीन तक का सौदा कर रखा है। कोशिश तो बहोत की इन लोगो ने पूरे देश का सौदा करने के लिए। पर ये भारत देश है सदियों से अपने विरोधियो को जमीन में दफनाने का काम किया है।

कांग्रेस का कुकुरमुत्ता सिस्टम: परिवार के इर्द-गिर्द घूमती राजनीति:- सबसे बड़ा सवाल आज भी यही है की इस पार्टी में कोई भारतीय है या सब विदेशो से एक्सपोर्ट किये हुए है।
कांग्रेस आज किसी विचारधारा का नहीं, बल्कि एक बंद विदेशी इकोसिस्टम का प्रतीक बन चुका है। जिस राजनीती पार्टी को अगर प्रचार के लिए विदेशो के मंच की जरूरत पड़ती हो तो उन्हे शायद इलेक्शन भी वही लड़ने चाइये।
जैसे कुकुरमुत्ता नमी और अंधेरे में पनपता है, वैसे ही यह सिस्टम जवाबदेही से दूर, दूसरे देशो के बंद कमरों की राजनीति में फलता-फूलता है। और ऐसी जगहों पे कभी भी भारत जोड़ो की कोई वकालत नहीं करता क्योकि इनका सपना ही भारत तोड़ो है।

देश में सवाल, विदेश में तालियाँ:-विदेशो से बैठकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की इज़्ज़त को उतारना इन्होने ये अपने परिवार का ठेका मान लिया है।
दूसरे देशो को इतना अपना समझना और खुद के देश को ही गाली देते रहते है। विदेशो में बैठकर देश की हर एक संस्था को चोर बोलना असहमति नहीं, अविश्वास का प्रचार है। विदेशी डीएनए है उबाल तो मरेगा ही।

विश्व मंच का कुकुरमुत्ता: सॉरोस हेडलाइन:- “खतरनाक विदेशी दुश्मन” सिर्फ़ सीमा पर नहीं होते, कई बार वे हमारे देश के राजनेताओ के साथ मंच भी साझा करते है। और अछि सी इंग्लिश बोलते हुए ये बता दिया जाता है की अगर भारत में अगर इस परिवार की सरकार नहीं तो देश में सब कुछ चोरी
हो किया जा रहा है। हमारे देश के कुछ दोगले इसको राजनीती करने का मंच समझ लेते है जबकि राजनीती उसके लिए बानी ही नहीं है।
जिनका काम देश को मनोरंजन करने के लिए और चुनाव हारने का है।

राजनीति नहीं, पीढ़ी दर पीढ़ी लूट मॉडल:-यहाँ मामला किसी एक परिवार का नहीं, बल्कि कई खानदानों की कतार का है,भारत को विकास रोकने वाली इस खानदानी मानसिकता से बाहर निकलना होगा, क्योंकि देश आगे बढ़ता है मेहनत और मेरिट से, वंशावली से नहीं।
भारत का हर राज्य एक परिवार की लूटने की सम्पति बन चूका है। और इन परिवारों ने देश के सबसे बड़े लूटेरे परिवार को देश खुला लूटने की छूट दे राखी है।

जनता वोट देती रही, खानदान लूटते रहे:-यही आज की राजनीति की कड़वी हकीकत है। जनता ने भरोसा दिया, उम्मीदें बाँटी, लोकतंत्र के हर मंच पर अपनी आवाज़ पहुँचाई, लेकिन बदले में उसे केवल खानदानों की लूट और सत्ता के खेल मिले। चुनाव सिर्फ़ तमाशा बन गया, नीति और विकास पीछे रह गए। हर पीढ़ी ने वादा किया—पर पीढ़ी दर पीढ़ी वही सिस्टम चल रहा है: जनता मेहनत करे, खानदान सुख उठाए। संसाधन, योजनाएँ, सत्ता—सब पर कब्ज़ा, और जवाबदेही कहीं नहीं। देश के भीतर भ्रष्टाचार और निजी हितों की यह धारा इतनी गहरी है कि असली नेता दब जाते हैं, और वही दिखते हैं जो वंश, रिश्ता और लालच से सत्ता संभालते हैं। Gen-Z अब देख रही है कि लोकतंत्र सिर्फ़ वोट देने का खेल नहीं, बल्कि जनता के भरोसे पर आधारित युद्ध का मैदान है, और अब कोई भी यह तमाशा बर्दाश्त नहीं करेगा।

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