Iltija Mahbooba Mufti “The Poisonous Radical Mindset Destroyed Kashmir:-“Mufti-e-Jaffar” कश्मीर की कट्टर कलि!

“Mufti-e-Jaffar: कश्मीर में गद्दारी का प्रतीक। वैसे तो कश्मीर की राजनीति में कई सालों से बहोत परिवारों के गुप्त एजेंडों ने अपनी टुकड़े गैंग वाली सोच से कश्मीर को नरक बना दिया था। इन्ही कश्मीरी खानदानो में से एक ने अपनी जेहादी सोच को बरक़रार रखते हुए अपने चिराग को विदेश भेज दिया विद्वान बनने के लिए। जिनकी तालीम ही मदरसों के इर्द गिर्द घूमती हो। ऐसो के लिए विदेशी प्रतिष्ठित संस्थान भी मदरसों की तरह हैं।
भारतवासिओ के टैक्स की कमाई से ली गई डिग्री इस “Mufti-e-Jaffar” के लिए भारत तोड़ो में काम आती है।
“Mufti-e-Jaffar” के लिए लंदन यूनिवर्सिटी भी ISIS जैसी”-“Mufti-e-Jaffar के लिए लंदन यूनिवर्सिटी पढ़ाई का केंद्र नहीं, एजेंडा का ट्रायल रूम बनी। विदेशी डिग्री मिली, लेकिन सोच अब भी मज़ारों जैसी। नाम में विदेशी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा हो सकती है, लेकिन सोच और एजेंडा मज़ारों जैसी पुरानी मानसिकता का परिचायक है।
“नाम और सोच खानदानी, खेल वही जफर वाला।”
“दाग़दार अतीत: संदेहों से भरा “Mufti-e-Jaffar” परिवार “-कश्मीर की राजनीति में अगर किसी एक चीज़ ने सबसे ज़्यादा सवाल खड़े किए हैं, तो वह है मुफ़्ती परिवार का दाग़दार राजनीतिक इतिहास। वर्षों तक सत्ता में रहते हुए लिए गए फैसलों ने कश्मीर को स्थिरता नहीं, बल्कि संदेह, भ्रम और अविश्वास दिया।
इसी Mufti-e-Jaffar के दादा जी पर भी आरोप लगाया जाता है की उन्होने अपनी ही बेटी का खुद का ही अपरहण करवाके घाटी में आतंकवादियों को छोड़ा था। जिन्होने बाद में कश्मीरी हिन्दुओं का खून बहाया था।
पासपोर्ट पहचान का काग़ज़ है, पर कट्टरपंथ पहचान का प्रमाण:- इनकी तो भारतीय पहचान सिर्फ़ नाम की है—लक्षण और एजेंडा बताने की जरूरत नहीं है। क्यों की एजेंडा तो इन जेहादियों के मुँह से फिदायीन की तरह लगता हैं।
इसकी पहचान सच में भारतीय होती, तो ज़हर उगलने वाली कट्टरवादी जेहादियों की पीढ़िया से वास्ता रखने वाली कश्मीर की कट्टर काली इस भारत माँ को लीनचिस्तान न बोलती।
आरएसएस को कैंसर बोला, जेहादी और गद्दार क्या समझेंगे RSS को?” :-RSS कोई ऐसा वैसा शब्द नहीं है की इन जैसे कट्टरपंथी जेहादी सोच वाले अपनी जहरीली जुबान से इतने पवित्र शब्द को निकाले।
जिन परिवार और खानदानो ने इस देश को नोच नोच के खाया हो उन लोगो के लिए ये नफरत भरा शब्द है।
चार बूँद खून गलती से धरती पे बहाकर मदरसे छाप पूरे देश को फिलिस्तीन बनाने का सपना देखते है। और इनके ऐसे कट्टर सपनो में इनका साथ देने वाली कट्टर कलि “Mufti-e-Jaffar”.
हिंदुत्व को “बीमारी” खुद गंदगियों के ढेर से:-आज कुछ लोग दूसरों की पहचान और संस्कार पर आरोप लगाते हैं, लेकिन खुद की अपनी सोच और नजरिया कट्टर वाली गंदगी से भरा हुआ होता है।
जिसको ये बीमारी बोलती है उसी बीमारी से जन्मे है ये लोग बस इनको इतिहास में झाकने की जरूरत है। इतनी खूबसूरत बीमारी से निकल के न जाने कौन से गंदगी के ढेर में दब गए है ये लोग।
