“Critics call Dhruv Rathee ‘Mini Pappu’, accusing him of promoting narratives that damage India’s image abroad.”:-देश के रंग का विरोधी ?

देश के रंग का विरोधी ?:-गोरेपन की हवस ने हमारे समाज और राष्ट्र दोनों को गहरा नुकसान पहुँचाया है। हमारे देश का तो इतिहास ही रहा है इस गोरे रंग की हवस में न जाने कितनी बार इस देश का सौदा होते हुए देखा है।
अब ऐसा लगता है की एक और गोरी चमड़ी के ऐश‑ओ‑आराम की पूर्ति के लिए देश के संसाधनों और सम्मान से समझौता करना पड़ेगा। पर इस बार सौदेबाजी जर्मनी से है इटली से नहीं।

गोरिया और जयचंद इतिहास गवाह:-सोचो तो सही, यह टैलेंट ही है कि कुछ गोरियां हमेशा सही जौइचंद को पकड़ ही लेती हैं। किसी का दिखावा, किसी का स्टेटस, या बस चमक—ये गोरियां इतने तेज़ दिमाग़ और स्किल के साथ अपने लक्ष्यों की पहचान करती हैं कि जौइचंद उनके सामने खुद को खुला छोड़ देते हैं।यही खेल हर दौर में चलता आया है—जहाँ स्वार्थ हावी हो, वहां गोरियों और जौइचंद का मेल हमेशा सफल रहता है।

गोरी और जौइचंद का रिश्ता: बस दिखावे का खेल:-यह रिश्ता कभी असली भावना का नहीं, कभी भरोसे का नहीं—बस दिखावे और स्वार्थ का खेल है। गोरियां अपने चमक‑धमक और दिखावे के पीछे जौइचंद को इतनी आसानी से पकड़ लेती हैं क्योंकि जौइचंद वही हैं जो केवल आराम, लाभ और स्टेटस के पीछे दौड़ते हैं। असली ईमानदारी, नैतिकता और देशभक्ति उनके लिए कभी मायने नहीं रखती।

जब देश बिकता है, गोरियों का ऐश चलता है:-सोचो तो सही, यह सच है कि कभी‑कभी देश के हित और संस्कृति की कीमत चुकाकर ही कुछ लोग अपने व्यक्तिगत आराम और दिखावे को आगे बढ़ाते हैं। जब स्वार्थ और दिखावा हावी हो जाता है, तो गोरियों का ऐश‑ओ‑आराम चलता है, और देश पीछे रह जाता है। यही वह दौर है जब जौइचंद जैसे लोग मौके का फायदा उठाते हैं—स्वार्थ, shortcuts और सिर्फ़ दिखावे के लिए अपने मूल्यों और देशभक्ति को बेच देते हैं।

140 करोड़ लोगो का सौदा एक गोरी के लिए :-सोचो तो सही, 140 करोड़ लोग, एक पूरी राष्ट्र की गरिमा और सम्मान, सिर्फ़ किसी के स्वार्थ और दिखावे के लिए सौदे की चीज़ बन जाएँ। यह वह हकीकत है जो हमें झकझोर देती है। कुछ लोग, जौइचंद जैसे, अपनी चमक, स्टेटस और shortcuts के पीछे इतने खो जाते हैं कि देश और जनता की कीमत उनके लिए बस numbers में बदल जाती है। और यही वजह है कि 140 करोड़ लोगों का सौदा आसानी से हो जाता है—बस एक गोरी के आराम, शो‑ऑफ और ऐश‑ओ‑आराम के लिए।

गोरियों का टैलेंट और जौइचंद की लालच की जोड़ी इस खेल को और तेज़ कर देती है। दिखावे के पीछे भागते हुए लोग, अपने मूल्यों और नैतिकता को भूल जाते हैं, और इसी भ्रम में राष्ट्र की असली कीमत चुकाई जाती है। यह सिर्फ व्यक्तिगत स्वार्थ की नहीं, बल्कि पूरे देश की असली हानि है।

सच्चाई यह है कि जब स्वार्थ और दिखावा हावी हो जाए, तो देश का भविष्य, संस्कृति और जनता सब पीछे रह जाते हैं। और तब यह खेल चलता रहता है—एक तरफ ऐश‑ओ‑आराम, दूसरी तरफ 140 करोड़ की कीमत।

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