सत्ता का नंगा नाच: जब मंत्री बनकर कानून को कुचला गया
जब आज़म ख़ान सरकार में मंत्री था, तब उत्तर प्रदेश में सत्ता का नंगा नाच खुलेआम दिखता था। कानून उसकी मर्ज़ी का मोहताज बना दिया गया था और प्रशासन डर के साए में काम करता था। थाने, अफ़सर और सिस्टम—सब पर राजनीतिक दबाव हावी था। आम आदमी की आवाज़ दबाई जाती थी, जबकि सत्ता के संरक्षण में गुंडागर्दी फल-फूल रही थी। न्याय की जगह धमकी, और संविधान की जगह अहंकार ने ले ली थी। उस दौर में सत्ता सेवा नहीं, शोषण का औज़ार बन गई थी—जहाँ ताक़त के आगे सच झुकता और डर बोलता था।
रामपुर को निगलने वाला अजगर: आज़म ख़ान
जिस तरह अजगर धीरे-धीरे अपने शिकार को जकड़ कर निगलता है, उसी तरह रामपुर की ज़मीन, संस्थान और सिस्टम पर एक-एक कर कब्ज़ा किया गया। डर और दबंगई के सहारे विरोध की हर आवाज़ दबाई गई। सत्ता का इस्तेमाल सेवा के लिए नहीं, बल्कि वर्चस्व कायम करने के लिए हुआ।
उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे रामपुर में अवैध कब्ज़ों का ऐसा जाल फैलाया गया कि ज़मीनें एक-एक कर निगल ली गईं। सरकारी भूमि हो या निजी संपत्ति, दबंगई और डर के बल पर कब्ज़े कराए गए।
अगर बाबा न होते, तो आज़म ख़ान और उसके जैसो के पाप कभी बाहर न आते।”

आजम खान का पिताजी मुमताज अली रामपुर के नवाब वली खान बहादुर की घोड़ा बग्गी चलाते थे, लेकिन सपा राज में आजम खान खुद को राजा समझता था।
- आज़म खान ने तीन घंटे एक S.S.P. को अपने घर के बाहर खड़ा रहने का आदेश दे दिया था!
- आज़म खान ने जिला कलेक्टर से जूते साफ करवाने की बात कही थी!
- आज़म खान ने जया प्रदा की चड्डी का रंग बता कर अपमानित किया था!
- आज़म खान ने दलित महिला रामा देवी को भरे संसद में अपमानित किया था!
- मुख्तार अंसारी ने कोतवाली में ताला डलवा दिया था!
- अतीक अहमद ने बीस पुलिस वालों को अपने घर में कैद कर लिया था!
- इनके मुकदमो को सुनने से जज और मजिस्ट्रेट भी मना कर दिया करते थे!
इन जैसे गुंडों के राज में सपा का मतलब लाईसेंस प्राप्त गुंडागर्दी करने वाली राजनीतिक दल।
तब क्या कानून और संबिधान का राज था, या अखिलेश यादव, रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव खुद ही अपने आप को उ.प्र. समझते थे ?
“वक्त बदला—एक ईमानदार हिंदू शेर संन्यासी प्रदेश की गद्दी पर बैठा, और उसके बाद सब इतिहास बन गया।”

देखते देखते सब कुछ बदल गया, असहाय सी लगने वाली पुलिस को खुली छूट मिली, गाड़िया पलटने लगी ,कानून का राज स्थापित हुआ और ‘लंगड़ा ऑपरेशन’ अपराधियों के लिए चेतावनी बन गया। इनको घसीट घसीट कर थानों में लाने लगी, इनके घर में घुसकर ढिंढोरा पीटने लगी, नीलामियां होने लगी, धड़ाधड़ बुलडोजर चलने लगे, बड़े से बड़े माफिया और डॉन एनकाउंटर में मारे जाने के डर से सरेंडर करने लगे!
सच तो ये है कि जब सत्ता पर बैठा व्यक्ति अपने बाबा जैसा निष्ठावान और चरित्रवान होता है तो सबकी खुशहाली होती है, समाज का उत्थान होता है! और जिहादियों के यहाँ बुलडोज़र चलते है।
दो–तीन अतीक और मुख़्तार जैसे बड़े जिहादी गुंडों का अंत हो चुका है, सिस्टम अब साफ़ दिखने लगा है। लेकिन लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई। अब नज़र उस नाम पर टिकती है, जिसने सालों तक कानून को चुनौती दी। आज़म ख़ान, अब तुम्हारी बहुत याद आ रही है—क्योंकि जवाबदेही का वक्त अभी बाकी है।
आज़म ख़ान तुने पाप करते हुऐ सोचा भी नहीं होगा कि एक योगी आऐगा और जिंदगी सजा काटने में ही समाप्त करवा देगा।
