AR Rahman

AR Rahman, They never reformed—poison finally spilled out -ख़्वाजा मेरे ख़्वाजा’ इसके लिए सेक्युलर था, ‘छावा’ इसके लिए कम्युनल—आख़िरकार अपनी औक़ात दिखा ही दी।

बॉलीवुड से एक और नया ‘म्यूज़िक जिहाद
यह तो होना ही था। जब कभी इन लोगो को जबरन महानायक बना दिया जाता है या फिर मंच, कैमरा और संगीत की ताक़त थमा दी जाती है, तो असली सोच देर-सवेर सामने आ ही जाती है।
कला का उद्देश्य समाज को जोड़ना होता है, लेकिन जब वही मंच निजी नफ़रत, पक्षपात और ज़हर उगलने का माध्यम बन जाए, तो इनको सिरे से बॉयकॉट करना चाइये। समस्या पद या पहचान की नहीं, मानसिकता की है, जो इनको इनके कट्टर मौलानाओ और बॉलीवुड में पहले से बैठे जिहादी टुकड़े गैंग वालो से ज़हर के रूप में मिलती है।
ऐसे एहसान-फ़रामोश लोगों के समर्थन में अब वही चेहरे खुलकर सामने आ चुके हैं, जिन्हें हम देश विरोधी सोच के लिए कई सालो से देश छोडने के लिए प्रेरित कर रहे है, शायद नाम बताने की जरूरत नहीं है वो लोग अपनी पहचान समय समय पर बॉलीवुड जिहाद के नाम से बता देते है।

इसके अंदर का औरंजेब जाग गया और इसे हिंदू योद्धाओं में कम्युनल और मुग़लों में सेक्युलर नज़र आता है।

Music Jihad


हम सनातनी अगर किसी मदरसा छाप को म्यूजिक डायरेक्टर के नाम पे फेमस कर देते है तो बदले में वो मुगल बनके एहसान उतारते है, और अब यही पहचान बॉलीवुड की बन चुकी है।
जिस व्यक्ति को भारत में छावा जैसी फ़िल्म भी गलत या आपत्तिजनक लगती है, ऐसे व्यक्ति को हम देश विरोधी कहे या नहीं ?
आखिरकार इन्ही लोग की ही सोच इतिहास, बलिदान और सांस्कृतिक आत्मसम्मान को समझने में असफल क्यों रहती है?

आज इसे टैलेंट की कमी दिखती है, क्योंकि सारा ‘टैलेंट’ तो टुकड़े गैंग में लगा हुआ है।
इसे लगता है कि आज टैलेंट को काम नहीं मिल रहा, जबकि सच्चाई यह है कि समस्या टैलेंट की नहीं, नज़र की है। जब सोच में “टुकड़े” वाली झलक हावी हो जाती है, तो योग्यता दब जाती है। पूर्वाग्रह अवसरों को मार देता है, मेहनत को नहीं।
सब कुछ इन्हें सनातनियों से ही चाहिए—मंच भी, पहचान भी, और दर्शक भी—लेकिन नफ़रत भी उसी सनातन समाज के योद्धाओं, परंपराओं और आम लोगों के लिए। यह विरोधाभास साफ़ दिखाता है कि समस्या संसाधनों या अवसरों की नहीं, बल्कि सोच की है। जब स्वीकार्यता सुविधा पर टिकी हो और आलोचना पूर्वाग्रह पर, तब रचनात्मकता नहीं, प्रोपेगेंडा जन्म लेता है। समाज अब सवाल पूछ रहा है, और यही सबसे बड़ा बदलाव है।

“हिंदू शेरनी कंगना रनौत ने कट्टर मौलाना रहमान की सोच को शब्दों से रगड़ दिया।”-“आप जैसा नफरत फैलाने वाला इंसान नहीं देखा”

कंगना अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने रहमान विवाद पर एक इंस्टा स्टोरी साझा करते हुए रिएक्शन दिया है। उन्होंने लिखा,
‘प्रिय रहमान जी, मुझे फिल्म इंडस्ट्री में एक भगवा पार्टी को सपोर्ट करने की वजह से बहुत ज्यादा भेदभाव और पक्षपात का सामना करना पड़ता है, फिर भी मुझे कहना होगा कि मैंने आपके जैसा पूर्वाग्रही और नफरत करने वाला इंसान नहीं देखा।
मैं आपको अपनी डायरेक्टोरियल फिल्म ‘इमरजेंसी’ की कहानी सुनाना चाहती थी। कहानी सुनाना तो दूर, आपने मुझसे मिलने से भी इंकार कर दिया था। मुझे बताया गया कि आप किसी प्रोपेगेंडा फिल्म का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
विडंबना यह है कि ‘इमरजेंसी’ को सभी क्रिटिक्स ने एक मास्टरपीस कहा, यहां तक कि विपक्षी पार्टी के नेताओं ने भी मेरी फिल्म की तारीफ करते हुए फैन लेटर भेजे, लेकिन आप अपनी नफरत में अंधे हो चुके हैं। मुझे आपके लिए दुख होता है।

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