Akash Banerjee

Akash Banerjee’s narrative influence is SIR more dangerous than ISIS- SIR, ISIS से भी ज़्यादा ख़तरनाक बताया जा रहा है, क्योंकि यह राष्ट्र की जड़ों पर वार करता है।

The Deshbhakt जैसे चैनल देशभक्ति के नाम पर नहीं, बल्कि देश तोड़ने वाली सोच के वाहक बनते जा रहे हैं।
The Deshbhakt जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों को सबसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे आखिर किस देश के भक्त हैं। Gen-Z का मानना है कि इनके वीडियो अक्सर नहीं हमेशा अधूरी जानकारी, भ्रामक दावे और चालाकी भरी प्रस्तुति पर टिके होते हैं। कट्टर जिहादियों जैसी भाषा और नैरेटिव कट्टर सोच रखने वालों को वैचारिक खाद-पानी देता है, जिससे समाज में रह रहे जैचंद जैसो का अविश्वास और विभाजन बढ़ता है। अभिव्यक्ति की आज़ादी जरूरी है, लेकिन जिम्मेदारी के बिना आज़ादी नुकसानदेह बन जाती है।

देशभक्त नहीं, “विपक्षी भक्त” — नाम बदल लेना चाहिए या देश।
इसका कंटेंट देशहित से ज़्यादा विपक्ष-समर्थक नैरेटिव को आगे बढ़ाता दिखता है। आरोप है कि वीडियो में चुने हुए तथ्य, आधे सच और तीखा व्यंग्य इस तरह पेश किए जाते हैं कि एकतरफा राय बने।
जब प्राथमिकता सरकार-विरोध ही केंद्र बन जाए, तो “देशभक्त” नाम कितना ईमानदार है? Gen-Z के मुताबिक, यह शैली ध्रुवीकरण बढ़ाती है और बहस को संतुलन से दूर ले जाती है। अभिव्यक्ति की आज़ादी ज़रूरी है, पर निष्पक्षता और ज़िम्मेदारी भी उतनी ही अहम हैं—वरना नाम बदलकर “विपक्षी भक्त” कहना ज़्यादा सटीक लगेगा।

RageTubers के लिए Gen-Z प्लेटफॉर्म: अब मक्कारी की हर परत उतरेगी
अब समय आ गया है कि ऐसे RageTubers को उनकी ही भाषा में जवाब दिया जाए। Gen-Z सामने आ रहा है—बेहतर रिसर्च, तेज़ फैक्ट-चेक और डिजिटल समझ के साथ। यह पीढ़ी न तो आधे सच से प्रभावित होती है, न ही चालाक नैरेटिव से। जो लोग मक्कारी, भ्रामक कंटेंट और देश को नीचा दिखाने की कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ते, उनके लिए Gen-Z एक ब्रह्मास्त्र बनकर उभर रहा है। यह जवाब गाली या शोर नहीं, बल्कि तथ्यों, तर्क और ट्रांसपेरेंसी से दिया जाएगा। सोशल मीडिया अब एकतरफा मंच नहीं रहा; यहाँ सवाल भी होंगे, जवाब भी—और जवाबदेही भी।

ढाई फ्रंट पर लड़ाई है—आधा फ्रंट यहीं बैठे RageTubers हैं।
इस पंक्ति का मतलब सिर्फ़ सीमा या सड़कों की लड़ाई नहीं, बल्कि डिजिटल मोर्चे की जंग भी है। जब देश बाहरी चुनौतियों, आंतरिक समस्याओं और विकास की लड़ाई लड़ रहा होता है, तब कुछ RageTubers आधे सच, भड़काऊ भाषा और चालाक नैरेटिव से माहौल बिगाड़ते हैं। ये लोग बहस को समाधान की ओर नहीं, गुस्से और भ्रम की ओर मोड़ते हैं। ऐसे कंटेंट से समाज में अविश्वास बढ़ता है और असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। इसलिए आज की लड़ाई केवल हथियारों से नहीं, तथ्यों, समझ और जिम्मेदार संवाद से भी लड़ी जानी जरूरी है।

क्या इन RageTubers को विरासत में देश के टुकड़े करने का ठेका मिला है?
कुछ RageTubers जिस अंदाज़ में कंटेंट परोसते हैं, उससे इनके देश भक्त होने पे सवाल उठना स्वाभाविक है, इनका मकसद बहस सुलझाना है या भ्रम, गुस्सा और विभाजन फैलाना?
किसी भी मुद्दे पर बात करने के इनके तरीक़े को देखकर Gen-Z यह कहते हैं कि ऐसी सोच सनातनी परंपरा से नहीं, बल्कि मुग़लकालीन सत्ता-केंद्रित और कट्टर वैचारिक ढांचे से प्रेरित लगती है। यह सोच वास्तव में राष्ट्रहित में है या सिर्फ़ टुकड़े गैंग को खुला समर्थन देकर देश को टकराव में झोकना है ?

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