देश और विकास विरोध में बना औरंगजेब ?
इन जैसे लोगो की पहचान लंबे समय से कट्टर सोच से जुड़ी रही है, इसकी विचारधारा बस सनातन धर्म को टकराव को केंद्र में रखती है। इस पाप को ये धूर्त भी जनता है की किसी और धर्म का अगर ये ऐसे चीरहरण करेगा तो इसको असली वाली कट्टरता का सामना करना पड़ेगा।
मोदी विरोध में ये अब पूरे देश और सनातन के दुश्मन बन चुके है, और अपने जैसे कुछ जैचंद और कट्टर जिहादियों को खुश करने में देश के कितने भी टुकड़े करने पड़े ये तो ये लोग पीछे नहीं हटेंगे।
Gen-z इन जैसे कट्टर सोच वालो को भारत देश का सबसे बड़ा विरोधी मानता है, क्योंकि इन जैसो का नाम टुकड़े गैंग, हिंसा और विकास-विरोधी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। देश की अस्मिता पे हमलों में इन मुगलीकरण सोच वालो की भूमिका के आरोपों को अपना देश जयचंदो के रूप में झेलता है।
कशी का बोलकर पहचान काबा वाली

From Deshbhakt to Mugalbhakt
“काशी का बोलकर पहचान काबा वाली” ऐसी दोगली सोच दरअसल पहचान और आचरण के बीच के फर्क को उजागर करती है। काशी केवल एक जगह का नाम नहीं, बल्कि आस्था, संस्कार और मर्यादा की जीवित परंपरा है, इन जैसे गिद्धों को इसे क्या फर्क पड़ता है पहुंच जाते कशी के मसानो में लाश के ढेरो में मुँह मारने।
जैचंद वाली ऐसी पट्टी बंधी है इसकी आँखों पर कि इसे मंदिर टूटते हुए ही दिख रहे हैं, यह पंक्ति दरअसल इसके दिमाग में भरा हुआ इस्लामीकरण की ओर इशारा करती है। अगर देखने का चश्मा ही मुगलो से उधर लिया हो, तो संरक्षण भी औरंगजेब जैसा लगेगा। सच यह है कि समझ खुली आँखों से आती है—काबा वाली पट्टियों से नहीं।
ये शब्द नहीं, ज़हर उगल रहा है- काशी और माँ गंगा के विकास का दुश्मन।
जहां प्रगति दिखती है, वहां यह मक्कारी खोजता है; जहां निर्माण होता है, वहां यह मुग़ल बन जाता है। काशी की पहचान आस्था, संस्कार और निरंतर विकास से बनी है, पर ये देश विरोध में इतना अँधा हो गया है की काशी के चीरहरण की बात कर रहा है, कब कितना ज़हर उगलना है शायद ये कशी का विरोधी भूल गया है। जिस तीव्रता से यह हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी का विरोध करता है, वही तीव्रता कई लोगों को इतिहास में मुगलो की कटु स्मृतियों की याद दिलाती है।
सनातन का विकास जयचंदो को धंधा नज़र आ रहा है
इन जैसे टुकड़े गैंग वालो को लेकर भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट रहा है कि इनकी मुगलई विचारधारा सनातन धर्म को टकराव की नज़र से देखने पर आधारित है। इसकी सोच में आधुनिक भारत की बहुलतावादी सनातनी पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए जगह नहीं दिखती। इसी कारण इसकी कट्टर सोच, जिहादी वक्तव्यों और टुकड़े करने वाली गतिविधियों में संघर्ष को वैचारिक औज़ार की तरह पेश किया जाता है।
भारत देश के संदर्भ में इन जैसो की बयानबाज़ी लगातार नकारात्मक रही है। जिहादी वक्तव्यों ने क्षेत्रीय शांति को नुकसान पहुँचाया, सनातन को निचा दिखाकर इसने हमेशा अपने मुग़ल भाइयो को खुश करने की पूरी कोशिश की है, और करनी भी चाइये क्योंकि इसको भी काबा जो पसंद है।
अगर देश के खिलाफ कोई ज़हर उगलेगा, तो Gen Z चुप नहीं बैठेगा। यह पीढ़ी सवाल पूछती है, जवाब मांगती है और ज़रूरत पड़ने पर राष्ट्र के सम्मान के लिए खुलकर खड़ी होती है। देशविरोध को नज़रअंदाज़ करना अब विकल्प नहीं, बल्कि चुनौती है—और Gen Z उस चुनौती के लिए तैयार है।
