Zakir Naik जैसे प्रभावशाली जिहादी उपदेशक देश को कैसे खोखला कर रहे थे?
इस जैसे प्रभावशाली जिहादी वक्ताओं की गतिविधियाँ और बयान केवल धार्मिक उपदेश तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने समाज में कट्टरता के माध्यम से ध्रुवीकरण को भी बढ़ावा दिया।
सनातन के प्रति नफ़रत में इतना अंधा हो जाना की देश की सामाजिक ज़मीन ही कट्टर सोच के लिए उपजाऊ बनाने लगा। जब ऐसे जिहादी की विचारधारा का विरोध घृणा में बदल जाता है, तब वह समाज को अलकायदा और ISIS जैसी जमीन तैयार कर के देता है, जो समुदाय पहले से ही इतना कट्टर हो और उसमे इस जैसे जिहादी घी का काम करते है।
जाकिर नाइक की सोच वही धारा दिखाती है, जो ओसामा, ISIS और हाफ़िज़ सईद से जोड़ी जाती है।”
बहोत से वीडियो क्लिप्स में उसके कथनों को इस तरह उद्धृत किया गया कि यदि किसी आतंकी संगठन के लक्ष्य “सही” हों तो वो आतंकी संगठन नहीं, ये ऐसे जिहादियों का प्रेम है अपने करीबियों के प्रति।
इसने अपने बहोत से वीडियो में अपने बड़े भाई ओसामा बिन लादेन को लेकर सहानुभूति जताई थी। इन जैसे लोगो का आपस में 2014 से पहले बहोत भाईचारा चल रहा था, क्योकि यहाँ कांग्रेस सरकार ऐसे कट्टर जिहादियों के पक्ष में खुलकर खड़ी होती थी तभी इन जैसे ज़हर उगलने वाले सपोले देश को भी डसने लगे थे, चुकी कांग्रेस इन जैसे लोगो पे ध्यान कैसे देती वो तो भगवाधारी आतंकवाद में व्यस्त थे।
“तीन नाम, एक बहस: जाकिर–कांग्रेस–पाक”-

आलोचकों के अनुसार, Zakir Naik ने सार्वजनिक मंचों पर दिए अपने बयानों में ऐसी बातें कहीं, जिन्हें उनका ‘कबूलनामा’ कहा जाता है। यही कारण है कि उन वक्तव्यों पर देश-विरोधी सोच और कट्टर प्रभाव के आरोप आज तक बहस के विषय बने हुए हैं।
मैं पाकिस्तान एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट से मलेशिया से गया था। मेरे पास कुल 1300 किलो सामान था। उसमें से 1000 किलो सामान तो एडजस्ट हो गया, लेकिन 300 किलो सामान ज्यादा था।
काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने मुझसे बहुत ज़्यादा पैसे मांगे। तब मैंने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के सीईओ को फोन किया। उन्होंने कहा, ‘ज़ाकिर भाई, आपके लिए 50% डिस्काउंट दे दूंगा।’
मैंने कहा, ‘मुझे आपका डिस्काउंट नहीं चाहिए। जब मैं भारत में था, तब कोई भी एयरलाइंस मुझसे सामान का कोई चार्ज नहीं लेती थी, चाहे वह 1000 किलो हो या 2000 किलो, और सभी लोग मुझे सम्मानपूर्वक नमस्कार करते थे।'”
इसके बाद ज़ाकिर नायक ने कहा, मोदी गलत हैं, लेकिन भारत गलत नहीं है। और एक दिन मोदी नहीं रहेंगे।
ज़ाकिर नायक के एक दोस्त, जो भारत की किसी एयरलाइंस में वेस्टर्न सर्कल के मैनेजर थे, उन्होंने बताया कि मनमोहन सिंह की सरकार के समय, सिविल एविएशन मंत्रालय का आदेश था कि अगर ज़ाकिर नायक के क्रू के पास कोई भी सामान हो, तो उसके लिए कोई चार्ज न लिया जाए। उसका वाउचर बना कर मंत्रालय से क्लेम कर लेना था।
मनमोहन सिंह- की सरकार के समय भारत और हमारे टैक्स के करोड़ों रुपए सिर्फ ज़ाकिर नायक पर खर्च किए गए, क्योंकि वह बड़े पैमाने पर हिंदू धर्मांतरण करता था। आलोचकों का दावा है कि Manmohan Singh की सरकार के दौरान भारत और करदाताओं के करोड़ों रुपये ऐसे मंचों और कार्यक्रमों पर खर्च हुए, जिनका लाभ Zakir Naik जैसे जिहादी विवादित प्रचारकों को मिला।
इसमें अहमद पटेल का अहम रोल था, क्योंकि वह ज़ाकिर नायक के करीबी दोस्त थे और सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव भी थे।
