Narendar Modi

21st century Sanatan revival as Narendra Modi moves to bulldoze the stain of Article 30- सनातनायुग मोदी जी Article 30 जैसे कलंक पर प्रहार करते दिखेंगे।

संविधान से छेड़छाड़ के कांग्रेसी कलंक—सनातनायुग मोदी जी कर रहे हैं साफ।”
अगर आप सनातनी हैं, तो यह सुनना मजबूरी नहीं, ज़िम्मेदारी है—क्योंकि जब चेतना सोती है, तभी इतिहास, संस्कृति और पहचान पर वार होता है। मोदी जी का दूसरा प्रहार आ रहा है, धारा 30 समाप्त हो सकती है!”
मोदी जी ने सनातनियों के साथ हुए उस ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने की पूरी तैयारी कर ली है, जो कभी नेहरू के दौर में विश्वासघात के रूप में देखा गया।

क्या आपने “धारा 30” के बारे में सुना है? क्या आप जानते हैं कि धारा 30 का मतलब क्या है?
‘धारा 30’ एक सनातन-विरोधी कानून है, जिसे नेहरू ने अन्यायपूर्ण तरीके से संविधान में शामिल किया था! जब नेहरू ने इस कानून को संविधान में शामिल करने का प्रयास किया, तो सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया।
सरदार पटेल ने कहा था,
“यह कानून हिंदुओं के साथ विश्वासघात है; अगर यह कानून संविधान में लाया गया तो मैं मंत्रिमंडल और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा!”
आखिरकार, नेहरू को सरदार पटेल के प्रतिरोध के सामने झुकना पड़ा।

लेकिन दुर्भाग्यवश, इस घटना के कुछ समय बाद ही सरदार वल्लभभाई पटेल का अचानक निधन हो गया…!!
पटेल की मृत्यु के बाद नेहरू ने तुरंत इस कानून को संविधान में शामिल कर दिया!

Article 30 सनातन धर्म के लिए कितना धीमा लेकिन घातक ज़हर था।

इस व्यवस्था के तहत, हिंदू अपने ‘सनातन धर्म’ की शिक्षा न तो स्कूलों में स्वतंत्र रूप से दे सकते हैं और न ही उसे औपचारिक रूप से ग्रहण कर सकते हैं।
आज़ादी और समानता की बात करने वाले ढांचे में यह स्थिति अपने-आप में एक विरोधाभास नहीं तो और क्या है?

धारा 30″ के तहत, मुसलमान और ईसाई अपने धर्म की शिक्षा देने के लिए इस्लामिक (मदरसा) और ईसाई (कॉन्वेंट) स्कूल चला सकते हैं, लेकिन हिंदू अपने गुरुकुल या वैदिक शिक्षा पर आधारित पारंपरिक स्कूल नहीं चला सकते, जो देश के मुख्य धर्म सनातन या हिंदू धर्म और संस्कृति को संरक्षित कर सके। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उन्हें इस कानून के तहत दंडित किया जाएगा!

साथ ही, मस्जिदों और चर्चों में दान से जमा सारा पैसा और सोना केवल उन्हीं का होता है। ऐसा सुनने में आता है की वो उस संपत्ति का उपयोग अपने अनुयायियों को बढ़ावा देने और अशिक्षित या कम शिक्षित हिंदुओं को धन के लालच में धर्मांतरण के लिए करते हैं। लेकिन हिंदू मंदिरों में जमा धन और सोने पर सरकार का नियंत्रण होता है!

“धारा 30” हिंदुओं के खिलाफ एक जानबूझकर किया गया विश्वासघात है!
मुस्लिम समाज में बच्चों को अपनी धार्मिक पुस्तक कुरान पढ़ना और समझना आवश्यक माना जाता है, और इसी तरह ईसाई समुदाय में भी बाइबिल के अध्ययन की परंपरा रही है। लेकिन जब बात हिंदुओं की आती है, तो स्थिति अलग दिखाई देती है। हमारे पास सनातन धर्म जैसा एक प्राचीन, वैज्ञानिक और दार्शनिक परंपरा पर आधारित धर्म है, फिर भी हमारी नई पीढ़ी को इसकी मूल शिक्षाओं, ग्रंथों और विचारधारा की समुचित समझ नहीं मिल पाती। यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब हर समुदाय अपनी आस्था और परंपरा को शिक्षा से जोड़ सकता है, तो हिंदुओं को अपने ही धर्म को जानने–समझने से दूर क्यों रखा गया? यही वह कमी है, जिस पर गंभीर आत्मचिंतन और जागरूक संवाद की आवश्यकता है।

आइए, हम सभी सनातन धर्म की रक्षा के लिए जागरूक बनें। इस लेख को पढ़ें, समझें और उस दौर में हुई नीतिगत गलतियों व अन्याय के बारे में समाज में सही जानकारी और चेतना फैलाएँ।

Narendar Modi JI

धारा 30 के कारण हम अपने ही स्कूलों और कॉलेजों में भगवद गीता जैसी महान ग्रंथ–परंपरा को औपचारिक रूप से पढ़ा नहीं पाते, जबकि यही भूमि सनातन धर्म की जड़ों से जुड़ी रही है। जिस ग्रंथ ने कर्म, कर्तव्य, आत्मज्ञान और जीवन-दर्शन सिखाया, उसे शिक्षा से अलग रखना एक गंभीर विरोधाभास को जन्म देता है। सवाल यह नहीं है कि किसी एक धर्म को प्राथमिकता दी जाए, सवाल यह है कि क्या अपने ही सांस्कृतिक और दार्शनिक विरासत को जानने–समझने का अधिकार भी सीमित होना चाहिए? यही वह मुद्दा है, जिस पर आज खुली और ईमानदार चर्चा की ज़रूरत है।

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