Arvind Kejriwal

Arvind Kejriwal has established himself as a political python in Indian politics:-अपनों को चबा गया, दूसरों को निगलने में एक्सपर्ट।

भारत की राजनीति में सबसे ख़तरनाक निगलने वाले हुनर से संपन्न महान जनता विरोधी अरविन्द केजरीवाल जी की बात कर रहे है। राजनीती में व्यक्ति इलेक्शन लड़ के अपने मुकाम को पाता है पर कुछ लोग अपने निगलने वाले हुनर से सत्ता को पा लेते है।
यही वजह है कि जब इन जैसे नेता अपनों को चबाकर आगे बढ़ते है, तो वह सिर्फ चालाक नहीं — देश के लिए खतरनाक भी माना जाता है।
शुरुआत हमेशा “साथ” से होती है। बड़े सपने, ऊँचे आदर्श, बदलाव की बातें और ईमानदारी के वादे। लोग जुड़ते हैं, कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे सत्ता नज़दीक आती है। और यहीं से शुरू होता है अपनों को चबाने का खेल।

जिस पेट में अन्ना समा जाए, वहाँ ज़मीर टिके—ये उम्मीद ही ग़लत है।
कभी एक नाम था जो नैतिकता, सादगी और व्यवस्था के खिलाफ खड़े होने का प्रतीक माना जाता था—Anna Hazare। उसी आंदोलन की कोख से देश को मिला टुकड़े गैंग का अजगर जिसमे सिर्फ सत्ता की भूख पैदा हुई, एक समय बाद उसने वही किया बस एक वृद्ध और लाचार से दिखने वाले आसान से शिकार Anna Hazare को पेट में समा लिया , वहाँ ज़मीर कैसे टिकेगा?
अन्ना जैसे प्रतीकों का ऐसे अजगर के पेटो में जाना सिर्फ़ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि आंदोलन से सत्ता तक के सफ़र की कीमत है। और यहाँ तो बस इस इंसान की शुरुआत हुयी थी।

राजनीति का मुखौटा था, काम देश का सौदा:-देश के ऐसे सौदागरों की पहचान एक ही होती है-देश दाँव पर, कुर्सी सुरक्षित। इन टुकड़े गैंग वालो के लिए लोकतंत्र में राजनीति का असली काम राष्ट्र के टुकड़े टुकड़े करना है, अगर अजगर का मुखौटा पहनकर देश का सौदा किया जाए, तो सत्ता भले मिल जाए पर आने वाली पीढ़िया के लिए ये लोग जैचंद से कम ना होगे।

इसे पंजाब का PM बनना था—देश सिर्फ़ सीढ़ी था। जब इन जैसा नेता किसी गंदगी के ढेर जैसे किसी आंदोलन में कूड़े के साथ चिपककर आ जाये तो ये अपने आप को प्रधानमंत्री भी समझने लगते है। अगर इस टुकड़े गैंग में कुछ राष्ट्र भक्त न होते तो ये पंजाब को खालिस्तान बनाने की सोच रहा था बल्कि उस रास्ते पे चल भी पड़ा था। अगर लक्ष्य पंजाब का PM बनना हो और देश सिर्फ़ सीढ़ी लगे, तो ऐसे लोगो को हमारे यहाँ मौकापरस्त कहते है।

Ram Mandir की जगह यूनिवर्सिटी, टुकड़े गैंग , एजेंडा प्राथमिकता। जब इन जैसे आंदोलन जीवी नेताओ द्वारा कहा जाता है कि Ram Mandir की जगह यूनिवर्सिटी होनी चाहिए, बस ऐसा ही मन हमारे देश की जनता करता है की इनकी जगह भी भारत नहीं पाकिस्तान या सीरिया होनी चाइये।
इन जैसे नेता हमारी सनातन आस्था के विरोधी है। क्यों की हमारा देश राष्ट्र भक्त के साथ साथ कुछ टुकड़े गैंग वाले मौलानाओ को भी पैदा करता है।
मंदिर किसी एक संरचना का नाम नहीं, बल्कि सदियों की सांस्कृतिक स्मृति, संघर्ष और पहचान का प्रतीक है। उसे हटाकर “यूनिवर्सिटी” का सुझाव देना सिर्फ़ वैकल्पिक सोच नहीं, बल्कि यह संदेश देता है कि कुछ लोगों की आस्था उनके लिए असुविधाजनक है। और जहाँ असुविधा होती है, वहाँ सहिष्णुता नहीं—राजनीति काम करती है।

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