Dhruv Rathee ‘Mini Pappu’; “Your skin tone can be global, but your stance should stay local. देश से नफ़रत, रंग से नफ़रत—घृणा की हद।

गोरी चमड़ी की कीमत: देश ने जो झेला:-गोरी चमड़ी के मोह के लिए इस देश ने बहुत कुछ भुगता है। सदियों तक सत्ता, सोच और आत्मसम्मान को रंग के तराज़ू पर तौला गया। जो खुद ही इस चमड़ी के रंग में पैदा हुआ हो और खुद का ही अपना परिवार इसी देश में रहता हो उसके बावजूद बस कुछ पैसो के लिए अपने देश के साथ साथ अपने परिवार की चमड़ी पे शक करता है। ऐसा है हमारा “MINI PAPPU”.
हरियाणा की मिट्टी में पैदा होकर, विदेशी एजेंडे का जयचंद ?:-इन जैसे टुकड़े गैंग को ये बताना भी बहोत जरूरी है की जयचंद भी एक गोरी चमड़ी वाला देश का गद्दार था। अब इतना सोचने की जरूरत नहीं है की जैचंद भारतीय था। गोरी चमड़ी बस उन नाम वालो के लिए जाता है जो देश को बस तोड़ने की ही सोचते है। एक गोरी चमड़ी का खर्चा पूरा देश मिलकर कई सालो से उठा रहा है। और तेरी गोरी चमड़ी का खर्चा तुझे अपने देश को बेचने से ही मिल रहा है।
उसे क्या पता की जो यूरो वो खर्च कर रही है वो तू अपना देश बेच के लता है।
ऐसे ग्लो का क्या फायदा जो नमक हरामी से बना हो :-क्या कभी ये मिनी पप्पू जर्मनी की बदनामी करके या उसे निचा दिखाकर वहां चैन से रह पायेगा? क्या इसे इसकी गोरी चमड़ी वाली जर्मन में नमक हरामी करने पर इसे वहां से धक्के मारकर इसको निकालेगी। क्यों की नमक हराम ये है वो नहीं।
रही बात यहाँ वालो की तो वो भी उसी देश के सौदेबाजी के कमाए हुए पैसो से पल रहे है।
जाटो के इतिहास पे संदेह :- इतिहास गवाह है की जाटो का नाम आते ही दुश्मनो के पाजामे ढीले हो जाते थे। सदियों तक देश की रक्षा की है। न जाने कितने सुरवीर के नामो से इतिहास भरा पड़ा है। जाटो के ऐसे महान इतिहास के सामने जब ऐसे छोटे मिनी पप्पू अपनी चमड़ी का रंग बदल ले। और खुलेआम देश की इज्जत को जर्मनी से उछाल रहा हो। क्यों की ये सब इसलिए आसान है की यहाँ पर भी बैठे इनके जैसे बहोत संख्या में है।
क्यों लगाई थी जाह्नवी की फोटो? अगर इस देश की चमड़ी से इतनी नफरत थी तो जाह्नवी की फोटो क्यों लगायी जबकि खुद के पास तो गोरी चमड़ी है। ध्रुव ने स्पष्ट किया कि उनके वीडियो का विषय ‘प्लास्टिक सर्जरी’ और समाज पर उसके प्रभाव के बारे में था. उन्होंने कहा, ‘इस पूरे वीडियो में मैंने जाह्नवी कपूर से कोई सवाल नहीं किया है.’ उन्होंने बताया कि थंबनेल में जाह्नवी की तस्वीर इसलिए इस्तेमाल की गई थी क्योंकि वह उन चुनिंदा बॉलीवुड अभिनेत्रियों में से हैं जिन्होंने खुलकर स्वीकार किया है कि उन्होंने कॉस्मेटिक प्रक्रियाएं (Cosmetic Procedures) करवाई हैं.
मिनी पप्पू जर्मन वाले :-ध्रुव की सामग्री पर सवाल इसलिए उठते हैं क्योंकि कई बार उसमें संतुलन की जगह चयनित नैरेटिव ज़्यादा दिखता है। आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन जब हर मुद्दा एक ही वैचारिक फ्रेम में फिट किया जाए, तो दर्शक को पूरी तस्वीर नहीं मिलती। तथ्यों की प्रस्तुति में संदर्भ, प्रतिपक्ष और वैकल्पिक दृष्टिकोण उतने ही ज़रूरी होते हैं, जितना सवाल उठाना। सोशल मीडिया के प्रभावशाली मंच पर बैठे व्यक्ति की ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह सूचना और राय के बीच की रेखा साफ़ रखे। स्वस्थ बहस वही है जो असहमति को जगह दे, न कि दर्शकों को एक ही दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करे।
“🔥 Love the nation enough to challenge it”
