Humayun Kabir’s Babri Masjid Murshidabad:-जिहादियों और टुकड़े गैंग के लिए संजीवनी की तरह।
Humayun Kabir’s की हिम्मत की तारीफ करनी पड़ेगी की बिना कुछ सोचे बिना डरे हुए और उस देश में जहा १२० करोड़ हिन्दू रह रहे हो। और वो ऐसे आक्रांता समलैंगिक (बाबर) की मस्जिद बना रहा हो और वो भी खुलेआम धमकी देकर।
इन जिहादियों के हौसलों की वजह पूरे देश में बैठे इनके अब्बू , और यहाँ इनकी खाला जो है।

पैटर्न वही—जिहादियों का स्लीपर सेल।
हुमायुँ कबीर की हिम्मत की तारीफ करनी पड़ेगी की बिना कुछ सोचे बिना डरे हुए और उस देश में जहा १२० करोड़ हिन्दू रह रहे हो। और वो ऐसे आक्रांता समलैंगिक (बाबर) की मस्जिद बना रहा हो और वो भी खुलेआम धमकी देकर।
इन जिहादियों के हौसलों की वजह पूरे देश में बैठे इनके अब्बू , और यहाँ इनकी खाला जो है।
“इतिहास चीख-चीख कर कहता है—इनसे धोखा तय है।”
यह कोई नई बात नहीं है। पीढ़ियों ने देखा, अनुभव किया और समझा कि भरोसा करने पर भी यही लोग अपने एजेंडे के लिए किसी का भी सर तन से जुदा कर सकते है। आज से बस १० साल पहले अगर ये बात कोई अगर बोलता तो इन जिहादियों के साथ टुकड़े गैंग भी खड़ा हो जाता।
चाहे सत्ता के गलियारों में हो या आम जनता के बीच, भाईचारे की मिठास सिर्फ़ एक छलावा है। भाषाएँ एक हो सकती हैं, मगर मूल स्वभाव नहीं मिलता है—अपने धर्म के फायदे के लिए छल करना जिहादियों की पैदाइश है।
“भारत विरोध में जीते है। रोज टुकड़े कर के सोते है।”
Humayun Kabir जैसे जिनका अपना इतिहास ही तलवार के सामने झुकने से पैदा हुआ हो। इनकी अपनी रीति-रिवाज और संस्कृति भी दूसरे देश के लूटेरो के सामने झुकने के बाद खैरात में मिली हुई हो। ऐसे जिहादियों को पालने और अपने देश के टुकड़े करवाने के लिए या अपने सनातनी भाइयो का सर तन से जुदा करने के लिए। हमे याद रखना चाइये की इतिहास गवाह है: जयचंद हमेशा मौजूद रहे हैं। और ये एक औरत भी हो सकती है।
कभी हिन्दुओं का खून बहाया था मौलाना मुलायम ने Babri Masjid के नाम पे।
हमें जितना उनसे लड़ना है, उससे कहीं ज़्यादा अपने ही अंदर बैठे जयचंदो से लड़ना है। जो बाहर से दुश्मन नहीं दिखते, बल्कि अंदर रहकर सनातन धर्म को खोखला करते हैं।असली लड़ाई उन अपनों से है जो सच जानते हुए भी झूठ का साथ देते हैं,जो सुविधा के लिए सिद्धांत और अपने धर्म तक का सौदा कर देते है हमें उन पाखंडियो सनातनियो से लड़ना है जो सनातन की आवाज़ उठाने वालों को दबाते हैं, यहाँ तक गोलिया चलवा दी जाती है। मौलाना मुलायम ने गर्व से कहा था की और भी खून बहाना पड़ा तो बहा दूंगा। भरोसा था उसे और उसके पुत्र को की ये लालची कौम है बिक जाएगी और कुछ तो आज भी गिरवी है इनके पास।
owaisi, Humayun, Babar, Rohingya सब भाई भाई
Humayun Kabir’s:-ये सब अलग-अलग नाम और चेहरे एक ही लाइन में पर पर्दे के पीछे खड़े दिखते है। कितनी देश विरोधी ताकते इनके साथ खड़ी है और तो और इनको हमारे संसद से भी सपोर्ट तक मिलता है। इनके रिश्तेदार जो बांग्लादेश से आते है, खाते हमारे देश की है और हमारी ही छाती पे बाबर मस्जिद बनाते है।
