Rahul Gandhi Germany Vacation:- जर्मनी में लगा जय चंदो का जमावड़ा-“सवाल जिहाद”

जॉर्ज सोरोस नाम तो आप लोगो ने सुना ही होगा ये नाम अपने ज्यादा २०१४ के बाद सुना होगा ये वो इंसान है जिसका सपना ही भारत के टुकड़े और जेहादियों को समर्थन और वो भी विदेशी धरती से.
नाम में ही गद्दारी की झलक मिलती है ऐसे देश के दुश्मनो से इनकी मुलाकात राहुल गाँधी से एक बहोत बड़ी देश के खिलाफ साजिस की तरफ इशारा कर रही है
ध्रुव राठी को नहीं मिली इज़्ज़त:-
तुम्हें क्या लगा कि जर्मनी आएगा हमारा “पप्पू” और तुमसे मिलेगा?
ऐसा कुछ नहीं होने वाला।
चलो, आज तुम्हें यह समझाते हैं कि हमारे नेता विपक्ष को जर्मनी बुलाने की ज़रूरत क्यों नहीं पड़ी।
जहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत-विरोधी एजेंडा चलाने वाले बड़े खिलाड़ी मौजूद हों, वहाँ छोटे मोहरों को आगे करने की ज़रूरत नहीं होती।
जिन ताक़तों के नाम वैश्विक राजनीति में खुलेआम लिए जाते हैं, उनके सामने ये स्थानीय चेहरे सिर्फ़ इस्तेमाल की चीज़ बनकर रह जाते हैं।
बात साफ़ है—
जहाँ बड़े मगरमच्छ हों, वहाँ छोटे मोहरों से काम नहीं चलता।
अरे राहुल और कितना गिराओगे भारत को:-
दूसरे देश में बैठकर अपने ही देश को नीचा दिखाकर जो तालियाँ बटोरी जाती हैं, वह आलोचना नहीं बल्कि खुला देशद्रोह है। विदेशी वाहवाही के बदले अपनी मातृभूमि की साख गिराना किसी बुद्धिजीवी का काम नहीं, यह मानसिक गुलामी की पहचान है। जिन्हें लगता है कि अपने ही देश की जड़ों पर कुल्हाड़ी चलाकर वे बड़े बन जाएँगे, वे यह भूल जाते हैं कि जड़ें कटते ही पेड़ खड़ा नहीं रहता, गिर जाता है।
देश को सुधार सवालों से किया जाता है, और उसे तोड़ा जाता है साजिशों से — फर्क अब देश साफ़ समझ चुका है।
भारत पर सवाल या भारत पर वॉर:-
गांधी परिवार ने मानो यह तय कर लिया है कि या तो सत्ता पर राज करेंगे, वरना देश को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। जब जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है, तब विदेशी मंचों से भारत की छवि को कटघरे में खड़ा करने की कोशिशें तेज़ हो जाती हैं।
विदेशी धरती से ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जिनका उद्देश्य समाधान नहीं, बल्कि भारत को बदनाम करना होता है—और इसी प्रवृत्ति को आज कई लोग “सवाल जिहाद” कहने लगे हैं। यह आलोचना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है, जिसमें देशहित नहीं, सिर्फ़ राजनीतिक हताशा झलकती है।
राहुल जर्मनी में बोले-RSS के लिए सच्चाई नहीं, शक्ति जरूरी:
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) चीफ मोहन भागवत की आलोचना की। राहुल ने कहा- RSS चीफ खुले तौर पर कह रहे हैं कि सच्चाई का कोई महत्व नहीं है, शक्ति महत्वपूर्ण है। यही उनमें और हममें अंतर है।
राहुल ने कहा- हमारी पूरी संस्कृति सत्य पर आधारित है। आप किसी भी धर्म को देख लें, मूल रूप से वे यही कहते हैं कि सत्य का पालन करो। कांग्रेस, महात्मा गांधी और आप सभी, हम भारत के सत्य की रक्षा करते हैं। RSS ऐसा नहीं करती।
बता दें कि राहुल गांधी 5 दिन के जर्मनी दौरे पर हैं। उन्होंने शुक्रवार को ओवरसीज इंडियन कांग्रेस के कार्यक्रम ‘कनेक्टिंग कल्चर्स’ में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। इसके अलावा उन्होंने जर्मन थिंक-टैंक में शामिल नेताओं के साथ बातचीत की और हर्टी स्कूल में भी स्पीच दी।
